Types of brick masonry

ईंटो की चिनाई के प्रकार

ईंटों  की चिनाई करने के प्रकार :

 

इस कार्य में ईंटों को परतदर - परत गारे की मदद से चिनायी कर एक आकृति का रूप दिया जाता है | ईंटो को उसके बिछाने के आधार पर कई भागों में बाटा गया है

स्ट्रेचर : ईंट का लम्बा पतला हिस्सा बाहर की तरफ रखकर सपाट बिछाया जाता है

हेडर : ईंट का चौड़ाई को सामने के तरफ रखकर सपाट रूप से बिछाया जाता है

सोल्डर : ईंट के  लम्बे पतले हिस्से को सामने रखकर खड़ा बिछाया जाता है

सेलर : ईंट का चौड़ाई को सामने के तरफ रखकर खड़ा बिछाया जाता है

रोलोक : ईंट खड़ा तथा बेंडा बिछाया जाता है

शाइनर : ईंट लम्बा चौडी लम्बी सतह को सामने रखा जाता है

 

ईंटों की चिनाई को दिखने के रंग :

ईंट के बिछाने के तरीके को रंगों से दर्शाया जाता है

  : स्ट्रेचर

 

  : हेडर 

 

  : ईंट का 3 चौथाई हिस्से को स्ट्रेचर तरीके से बिछाना 

 

  : ईंट का 3 चौथाई हिस्से को हेडर  तरीके से बिछाना 

 

  : ईंट का आधे  हिस्से को स्ट्रेचर तरीके से बिछाना 

 

  : ईंट को लम्बाई के समान्तर आधा काट कर बिछाना 

 

  : अन्य रूप से 

 


ईंटो का अनुबंध :

 

ईंटों की चिनाई के कए प्रकार होते है

फ्लेमिश अनुबंध :

 इस तरह के अनुबंध में दो हेडरों के बीच में एक स्ट्रेचर रहता है | और उसके ऊपर की परत में हैडर स्ट्रेचर के ऊपर बिछाया जाता हैदीवार के दोनों तरफ से यदि फ्लेमिश अनुबंध दिखाई देता है तो इस तरह के अनुबंध को डबल फ्लेमिश अनुबंध कहा जाता है

 

 

मॉन्क अनुबंध :

इस तरह के अनुबंध में हर एक हेडर के बीच में 2 स्ट्रेचर होते है | एवं हेडर को 2 स्ट्रेचर जंहा पर जुड़ते हैं उसके बिकुल ऊपर रखा जाता है

 

 

ससेक्स अनुबंध :

इस तरह के अनुबंध में हर एक हेडर के बीच मेंस्ट्रेचर होते है | एवं हेडर को तीनों स्ट्रेचों के बीच में रखा जाता है

 

 

 

 

इंग्लिश अनुबंघ :  इस तरह के अनुबंध में हेडर तथा स्ट्रेच प्रत्यावर्ती रूप से प्रयोग किये जाते है | और हेडर को स्ट्रेच के बीच में रखा जाता है

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